
पिछले तीन-चार महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में जिस गति से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उससे हैरानी होती है कि यह इसके बावजूद हो रहा है कि बलात्कार की कुछ घटनाओं को लेकर समूचा देश आंदोलित हुआ। समाज के स्तर पर जागरूकता बढ़ने के दावे किए गए, कानूनी स्तर पर कुछ ठोस पहलकदमी हुई। लेकिन बलात्कार की लगातार घटनाओं, यहां तक कि छोटी बच्चियों के साथ बर्बरता समूचे समाज के ढांचे पर सोचने को मजबूर करती है। मुझे लगता है कि बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए पुरुषों के भीतर ‘पुरुष’ होने का दंभ भी सबसे बड़े कारणों में से एक है। लड़के को बचपन से ही यह अहसास कराया जाता है कि वह पुरुष होने के कारण महिलाओं से ‘खास’ है, उसका होना ज्यादा अहमियत रखता है। हालांकि अगर हम बचपन से बेटों को विशेष होने और लड़कियों को कमतर होने...